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विश्वविद्यालयों की UG/PG सीटें अब नहीं रहेंगी खाली, CUET के बाद प्रवेश परीक्षा कराने की UGC ने दी छूट

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं।

नई दिल्ली: NTA द्वारा आयोजित CUET UG/PG 2024 में प्राप्त स्कोर के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने जा रहे हैं छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं। इस सम्बन्ध में UGC अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार द्वारा आज, 1 अगस्त को साझा की गई जानकारी के मुताबिक CUET स्कोर के आधार पर दाखिले के बाद बची रह गई UG/PG कोर्सेस की सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय अतिरिक्त मानकों का प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें अलग प्रवेश परीक्षा में शामिल हैं।

UGC द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए तैयार की गई SOPs में कहा गया है कि यदि किसी कोर्स की सीटें बची रह जाती हैं तो इसके लिए संस्थान द्वारा निम्नलिखित मानक अपनाए जा सकते हैं:-

• विश्वविद्यालय अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर सकते हैं या विश्वविद्यालय के सम्बन्धित द्वारा छंटनी परीक्षा (Screening Test) का आयोजन किया जा सकता है।

• विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं का दाखिला योग्यता परीक्षा (Qualifying Exam) के प्राप्तांकों के आधार पर भी कर सकते हैं।

CUET UG PG 2024: सीयूईटी के अंक ही मुख्य आधार

हालांकि, स्टूडेंट्स को ध्यान देना चाहिए कि UGC की तरफ से जारी SOPs में कहा गया है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों व सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले के लिए मुख्य आधार CUET के अंक ही होंगे। ऐसे में यदि CUET से बची सीटों के लिए यदि प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी किया जाता है तो अंतिम चयन सूची (Merit List) तैयार करने में CUET और प्रवेश परीक्षा दोनों के अंकों का प्रयोग किया जाएगा।

CUET UG PG 2024: खाली रह जाती थीं सीटें

UGC अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले के लिए आयोजित काउंसलिंग के 3-4 राउंड के बाद भी सीटें खाली रह जाने की सूचनाएं UGC को प्राप्त हो रही थीं। आयोग ने माना कि किसी भी शैक्षणिक वर्ष में रिक्त सीटें न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दी जा रही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से कई छात्र-छात्राएं वंचित हो जा रहे थे। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए SOPs तैयार की गई हैं।

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