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यूपी के बलिया इंटर काँलेज में नहीं बनेगा मेडिकल काँलेज, जानिये बड़ी वजह

बलिया में राजकीय इंटर कॉलेज बलिया के मैदान में मेडिकल कॉलेज का निर्माण होना सुनिश्चित किया गया था। लेकिन अब वह मेडिकल कॉलेज वहां पर नहीं बनेगा। बलिया: राजकीय इंटर कॉलेज (Inter College) बलिया (Ballia) के मैदान में मेडिकल कॉलेज (Medical College) के निर्माण को ग्रहण लग गया है। इंटर कॉलेज के ग्राउंड मेंअब वह मेडिकल कॉलेज नहीं बनेगा, बल्कि राजकीय इंटर कॉलेज अपने यथावत भूमि स्थान पर चलेगा। यह निर्णय मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) शासन की अध्यक्षता में 5 अगस्त 2024 की हुई बैठक में लिया गया है। जिसके बाद एक बार फिर मेडिकल कॉलेज के निर्माण (Construction) पर ग्रहण लग गया है। बैठक में लिया गया बड़ा निर्णय डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ कराये जाने के संबंध में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में  05 अगस्त 2024 को संपन्न हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राजकीय इंटर कॉलेज अपनी भूमि पर यथावत चलता रहेगा। किसको मिलेगी भूमि वर्तमान जिला कारागार को स्थानान्तरित करके नई जगह पर बनाया जाना प्रस्तावित है। इस कारण जिला कारागार की भूमि पर मेडिकल कॉलेज बनाया जाना उचित होगा। उक्त भूमि कैबिनेट के अनुमोदनोपरांत चिकित्सा शिक्षा विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित की जाएगी। मिलेंगी बेहतर सुविधाएं पुराना पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल वर्तमान स्थान पर यथावत चलता रहेगा। शहर के मुख्य मार्ग पर मेडिकल कॉलेज स्थापित होने के लिए उक्त स्थल को प्राथमिकता प्रदान की गयी है। जिससे आवागमन व आमजन को बेहतर सुविधा मिल पाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान कारागार को चिन्हित स्थान पर स्थानान्तरित किया जाये और तदोपरान्त वर्तमान कारागार के भवन का ध्वस्तीकरण एवं उसके मलबे का निस्तारण सक्षम स्तर से अनुमोनदनोपरान्त नियमानुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग अथवा लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कराया जाये।

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में छात्रों की मौत को लेकर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानें पूरा अपडेट

ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने कोचिंग सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया था। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: छात्रों की मौत के मामले में बेसमेंट के सह मालिकों की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामला सीबीआई के हाथों में दे दिया है। मामले की जांच अब सीबीआई के द्वारा की जाएगी। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के चार सह-मालिकों की जमानत याचिका का निपटारा कर दिया। जहां पिछले महीने सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर गौर किया कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है

दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले को लिए महत्वपूर्ण घोषणा, जानें पूरा अपडेट

दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वालों के लिए वि.वि की तरफ से जरूरी तारीख का ऐलान कर दिया गया है। जिन छात्रों को दाखिला हो गया है वे इस डेट से कॉलेज जा सकेंगे। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होने जा रही है। नए एडमिशन वाले छात्रों को 29 अगस्त से कॉलेज जाना शुरू करना है। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय ने शनिवार को 2024-2025 सत्र में प्रवेश लेने वाले स्नातक के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए बहुप्रतीक्षित शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया। जिसके अनुसार स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होंगी। आपको बताते चलें कि हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले बच्चों की लाइन लगी रहती है। विश्वविद्यालय की तरफ से स्नातक में दाखिले पूरे कर लिए गए हैं। वहीं अब छात्रों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है।

शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ती फीस: नीति-निर्माताओं में इच्छा शक्ति का अभाव या असंवेदनशील दृष्टिकोण?

देश में स्कूल से लेकर कॉलेज समेत हर शिक्षण संस्थान में लगातार फीस बढ़ोत्तरी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है लेकिन इसके साथ शिक्षा का गिरता स्तर भी चिंताजनक है। पढ़िये प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास का यह ब्लॉग नई दिल्ली: “शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन” ? लेख द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मन की व्यथा को विचारशील विवेकी पाठकों तक प्रेषित करने मात्र से क्या आपका कर्तव्य पूरा हो गया? क्या केवल प्रश्नचिन्ह लगाना पर्याप्त है? क्या आपके पास कोई सुझाव है? सहयोगी डॉ. गीता ने पूछा – समस्या के साथ समाधान होने चाहिये, ऐसा आप कहती है। मैंने कहा-समाधान और सुझाव हैं, लेकिन कोई समझना ही नहीं चाहता। “भारत की 28वीं शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी (26 मई 2014-5 जुलाई 2016) से लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया (14 फरवरी 2015–28 फरवरी 2023) तक से अथक प्रयासों के बाद मिलने का समय लेने में तो सफल हो गयी, किन्तु हाथ लगी केवल “घंटों की प्रतीक्षा और निराशा”। सांत्वना थी अथवा प्रोत्साहन नहीं जानती लेकिन उसने कहा – कोई बात नहीं, फिर  भी लिखिए शायद किसी को कुछ समझ में आ जाए । आपको लेखन के माध्यम से जन सामान्य की आवाज़ उठानी चाहिए। जैसे आप यशपाल कमेटी का उल्लेख कर रही है, भविष्य में कोई आपके सुझावों का उद्धरण दे सकता है। केवल त्रुटियों एवं असफलताओं की चर्चा मेरी मंशा नहीं हैं, लेख के माध्यम से धरातलीय स्तर पर सुझाव देने का दु:स्साहस कर रही हूँ । दिन-प्रतिदिन संस्थानों के अध्यक्षों, निदेशकों, प्राचार्यों और शिक्षक समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा कठिनाइयों की ओर सत्ता और शीर्षासन पर विराजमान शिक्षा मंत्रियों, विश्वविद्यालय के कुलपतियो एवं तथाकथित नीति-निर्माता शिक्षाविदों को ध्यान देने की आवश्यकता है। बस्ते का बोझ कम नहीं हुआयशपाल कमेटी 1993 की रिपोर्ट का शीर्षक ‘शिक्षा बिना बोझ के’ था, इससे पूर्व नरेन्द्र देव समिति – 1947, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 1986, में भी इस सम्बन्ध में सुझाव दिए गये थे। शिक्षा मंत्रालय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है और आवंटित बजट धनराशि को ख़र्च भी कर रहा है। फिर क्यों आज तक इन सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया ? क्या सरकारों द्वारा गठित समितियों, कमेटियो और आयोगों का गठन केवल हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के मुहं पर ताला लगाने के लिए किया जाता है कि देखिए सरकार कितनी संजीदा है। यदि यह सच नहीं है तो सुझावों की अनदेखी क्यों? सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक एवं चैयरमैन, पद्मश्री जयप्रकाश जी के नेतृत्व एवं प्रो. एच एल शर्मा जी के मार्गदर्शन में पहली से पाँचवी तक, एक कक्षा-एक किताब को सूर्या भारती के शिक्षाविदों ने वर्ष 2000 में ही तैयार कर दिया था। अन्य शिक्षाविदों और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी निरंतर इस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। सभी के द्वारा समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी और शिक्षा मंत्रियों के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। नि: स्वार्थ किए गये प्रयास एवं परिश्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा तो होती है, लेकिन नियमों को कठोरता से लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस क़दम नहीं उठाये जाते । यदि उठाये जाते तो पुन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बस्ते का बोझ कम कैसे हो ? सम्बन्ध में सुझाव/सिफारिश देने की आवश्यकता नहीं होती। सुझावसही अर्थों में पुस्तके अध्यापकों के लिए सूचनाओं का संग्रह और सैद्धांतिक दिशा-निर्देशिका होती है, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था ऐसी है कि विद्यार्थियों के बस्ते में अध्ययन सामग्री (पुस्तकें) रटने के लिए ठूस दी जाती है।पाठ्य पुस्तके विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रखी जाये, विद्यार्थी सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा दिए जाने वाली विषयक जानकारी को सुनें, उसे दोहराये, ग्रहण किए गये ज्ञान को लिखे और तदुपरांत पढ़कर उस पर चिंतन-मनन करें। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण पर अधिकाधिक बल दिया जाए, क्योंकि व्यवसाय और रोजगार के लिए यह आवश्यक है। पाठ्यक्रम का निर्माण मांग और पूर्ति के नियमानुसार हितधारकों के प्रतिनिधियों (शिक्षार्थी, शिक्षक, अभिभावक, नीति-निर्माता और अनुभवी शिक्षाविद) से विचार-विमर्श करके किया जाए। बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन?इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देना सामर्थ्य से बाहर है, किन्तु मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों की लाचारी मन को द्रवित कर देती है। 2-3 संतानों को पढ़ाना, दो समय की रोटी की व्यवस्था में लगे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, एक बच्चे की फीस लाखों में कहाँ से लाये । प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शैक्षिक गुणवत्ता की चर्चा व्यर्थ है। जिस गति से फीस में बढ़ोतरी हुई है, उससे अधिक गति से शैक्षिक बेरोजगारी बढ़ी है। उदाहरण के लिए यदि गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के फीस संरचना (structure) का तुलनात्मक विश्लेषण कर लिया जाए तो जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट हो जायेगा । सुधी पाठकों के लिए दो लिंक साझा कर रही हूँ। http://ipu.ac.in/norms/statues/s27-27.pdf http://www.ipu.ac.in/pubinfo2024/nt300424548%20(2).pdf सुझावस्वायत संस्थाओं (विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) की फीस मान्यता देने वाली (Affiliating body) संस्थाओं के माध्यम से ऑन लाइन हो सकती है। छात्रवृतियाँ देने की अपेक्षा एडमिशन के समय ही फीस माफ़ अथवा कम की जा सकती है। पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार शिक्षण सामग्री को दो भागों (सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक) में विभाजित किया जाए तथा सैद्धांतिक शिक्षण के लिए फीस की 50% राशि ही शिक्षण संस्थाओं को दी जाए। प्रयोगात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बंधित संस्थाओं में नि: शुल्क करवाया जाए । मेरा यह सुझाव “हींग लगे ना फिटकरी, रंग आए चोखा” कहावत को चरितार्थ करता है। इससे अभिभावकों को केवल आधी फीस ही देनी होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वर्ष दो वर्ष के लिए अवैतनिक जनशक्ति (Manpowar) मिलेगी। नौकरी के लिए इच्छुक युवाओं को रुचि और कौशल के आधार पर नौकरियां, स्व रोजगार हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन तथा उच्च शिक्षा के लिए उपाधि प्राप्त हो सकेगी। विकसित भारत @2047 के विजन की पूर्ण सफलता के लिए कमेटियों के गठन, सुझावों और लेख से बात नहीं बनेगी। सत्तारुढ़ राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं की इच्छा शक्ति और मानवीय संवेदना को झकझोरने का समय आ गया है। (लेखिका प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास, वर्तमान में  फेयरफील्ड तकनीक एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली , निदेशक के पद पर कार्यरत है ।)

NEET UG : दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए शुरू हुई प्रक्रिया, जानें क्या है डीयू का पहला एक्शन

डीयू ने नीट यूजी काउंसलिंग के लिए एक कदम आगे बढ़ा दिया है। छात्रों को डीयू में दाखिले का बेसब्री से इंतजार था। जिसकों लेकर डीयू ने भी काम शूरू कर दिया है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने नीट यूजी काउंसलिंग के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीडब्ल्यू (सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चे, विधवाएं) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दस्तावेज जमा करने की विंडो खोल दी है। सबमिशन पोर्टल पर चिकित्सा विज्ञान संकाय की वेबसाइट के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, नीट यूजी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और 85% दिल्ली कोटा के तहत 2024-25 शैक्षणिक सत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश चाहने वाले CW श्रेणी के उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से CW रियायतों के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने होंगे।

SSC Job: एसएससी में निकली बंपर भर्ती, बढ़ाई गई पदों की संख्या, जानें पूरा अपडेट

एसएससी एमटीएस में बड़े स्तर पर भर्ती निकली है। विभाग की तरफ से पदों की संख्या भी बढ़ाई जा चुकी है। युवा डाइनामाइट लाया है आपके लिए भर्ती की पूरी जानकारी। पढ़िये ये विशेष रिपोर्ट नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने सूचित किया है कि एसएससी एमटीएस 2024 के माध्यम से भरे जाने वाले मल्टी टास्किंग स्टाफ (गैर-तकनीकी) रिक्तियों की संख्या पहले अधिसूचित 4,887 रिक्तियों से बढ़ाकर 6,144 कर दी गई है। सीआईबीसी और सीबीएन में 3,439 हवलदार रिक्तियों के साथ, कुल संख्या अब 9,583 है। कर्मचारी चयन आयोग ने मल्टी टास्किंग स्टाफ, सीआईबीसी और सीबीएन में हवलदार के पदों पर की जानें वाली भर्ती के लिए रिक्तियों की संख्या बढ़ा दी है। उम्मीदवार इन बंपर पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि पहले 4887 पदों पर भर्तियां निकाली गई थी जिनकी संख्या अब बढ़ा दी गई है। जो उम्मीदवार इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं वे SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन दे सकते हैं.

पुलिस में जाने वाले युवाओं के लिए खुश खबरी, जानें कब तक बढ़ाई गई है पंजीकरण की डेट

नई दिल्ली: अगर आप पुलिस में नौकरी करने के इच्छुक है तो खबर आपके काम की है। इस जगह पर शासन की तरफ से सिपाही भर्ती की डेट आगे बढ़ा दी गई है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट जेकेएसएसबी ने 2024 के विज्ञापन संख्या 01 के तहत जम्मू और कश्मीर पुलिस, गृह विभाग में कांस्टेबल पदों के लिए पंजीकरण तिथियों को स्थगित करने की अधिसूचना जारी की है। पात्र उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर 8 अगस्त से 7 सितंबर तक शाम 5 बजे तक आवेदन किया जा सकता है। अब इन सेवा के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए अभी कुछ समय इंतजार करना पड़ेगा। पहले यह आवेदन विंडो 30 जुलाई 2024 को खुलने वाली थी। लेकिन अब इसकी तिथि बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई है। जो कि 7 सितंबर शाम 5 बजे तक खुली रहेगी।

Delhi Coaching Tragedy: UPSC की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील, देखें पूरी लिस्‍ट

दिल्ली के राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत के बाद प्रशासन ने अब जबरदस्त कार्रवाई की है। एमसीडी ने दिल्ली के कई कोचिंग सेंटर्स पर कार्रवाई करते हुए लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील कर दिये हैं। ज्यादा जानकारी के लिये पढ़िये डाइनामाइट न्यूज की ये रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली के राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत के बाद प्रशासन की ओर से अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। मामला बढ़ता देख एमसीडी ने दिल्ली के कई कोचिंग सेंटर को लगातार सील करने की कार्रवाई की। बता दें कि दिल्ली में अब तक UPSC की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट सील हो चुके हैं। इसमें राउज आईएएस कोचिंग सेंटर के अलावा डॉक्टर दिव्याकृति का कोचिंग सेंटर दृष्टि आईएएस भी शामिल है। बताया जा रहा है कि एमसीडी ने ओझा सर के आईएएस कोचिंग को भी सील करने की कार्रवाई की है। एमसीडी ने बताया कि ये कोचिंग सेंटर नियमों का उल्लंघन कर बेसमेंट में चलाये जा रहे थे। बेसमेंट में पानी घुसने के कारण ही राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत हुई थी। बता दें कि दिल्‍ली नगर निगम ने नियमों का उल्लंघन करने के मामले में 60 लाइब्रेरी और 8 कोचिंग संस्थानों को नोटिस भी दिया है। एमसीडी द्वारा रविवार और सोमवार को की गई कार्रवाई में यूपीएससी की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील किये जा चुकै हैं। इसमें आईएएस गुरुकुल, प्लूटस अकादमी, आईएएस सेतु, टॉपर्स अकादमी, चहल अकादमी, करिअर पावर, दैनिक संवाद, सिविल्स डेली आईएएस, 99 नोट्स, विद्या गुरु, साई ट्रेडिंग, गाइडेंस आईएएस और ‘इजी फॉर आईएएस’, दृष्टि IAS, वाजी राम IAS इंस्टीट्यूट, वाजीराम और रवि इंस्टीट्यूट, श्रीराम IAS और वाजीराम और आईएएस हब इंस्टीट्यूट आदि के नाम शामिल हैं।

DELHI university: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, जाने पूरी प्रक्रिया

दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वाले इच्छुक छात्रों के लिए रास्ते खुल चुके हैं। छात्रों को सीयूईटी की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक कार्यक्रम में दाखिला लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को कॉमन अंडरग्रेजुएट प्रवेश परीक्षा यूजी के लिए आधिकारिक वेबसाइट – cuetug.ntaonline.in के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। इसके अलावा, सीयूईटी के माध्यम से 2024 के लिए डीयू में प्रवेश पाने के लिए, उम्मीदवारों को दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉमन सीट आवंटन सिस्टम यूजी (CSAS UG)के माध्यम से आवेदन करना होगा। सीयूईटी यूजी परीक्षा पूरे भारत में 260 से अधिक विश्वविद्यालयों में प्रवेश की सुविधा प्रदान करती है।

CUET Result:सीयूटी रिजल्ट जारी होने के बाद आया बड़ा अपडेट, जानें एडमिशन को लेकर यूजीसी का बड़ा बयान

सीयूटी का रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों के बीच विवि. में दाखिला लेने के लिए उत्सुकता बढ़ गई है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) के परिणाम घोषित कर दिए हैं। अब स्नातक दाखिला प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। सीयूईटी-यूजी 2024 के लिए 13,47,820 ने पंजीकरण कराया था लेकिन 11,13,610 ने ही परीक्षा दी थी। नीट-यूजी और यूजीसी-नेट समेत विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता को लेकर जारी विवाद की वजह से सीयूईटी-यूजी के परिणाम घोषित करने में 28 दिन की देरी हुई। एनटीए ने सात जुलाई को अनंतिम आंसर-की जारी की थी। एनटीए के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 63 विषयों के लिए परीक्षा पहली बार हाइब्रिड मोड में कराई गई थी। 15 विषयों की परीक्षा पेन-पेपर से, जबकि 48 विषयों की परीक्षा कंप्यूटर माध्यम से हुई।