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ज्वलंत मुद्दाः नई शिक्षा नीति 2020- आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत

भारत में लंबे समय के बाद शिक्षा नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं। इस नीति में बदलाव के बाद अब ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि इस बदलाव की क्यों जरूरत पड़ी और क्या खास है इस नई नीति में..

नई दिल्लीः देश में मौजूदा शिक्षा नीति को अंतिम बार 1992 में अपडेट किया गया था। इस नीति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षाओं को दायरे में लाना है। छात्र को बचपन से ही उसके हुनर और दिलचस्पी के हिसाब शिक्षा देना है। ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ा जा सके।

ऐसा माना जा रहा है कि देश में रट्टू तोते वाली शिक्षा व्यवस्था से पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि भारत में समय समय पर शिक्षा नीति को बदला जाता रहा है।

अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे खत्म कर 5+ 3+ 3+ 4 के फार्मेट को मंजूरी दी गयी है। जिसका मतलब प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।

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